*भारतीय* *नववर्ष*
चैत्र की शुक्ल प्रतिपदा, ऋतु वसंत चितचोर,
फूट रही हैं कोंपलें, पुष्प खिले हर ओर।
शस्य श्यामला भू दिखे, हिय उमंग अरु हर्ष,
करते मंगलकामना, शुभ हो यह नव वर्ष
🙏🙏🌻🌻🌱🌱🌾🌾🌿🌿🌸🌸
-चारु शर्मा
*भारतीय* *नववर्ष*
चैत्र की शुक्ल प्रतिपदा, ऋतु वसंत चितचोर,
फूट रही हैं कोंपलें, पुष्प खिले हर ओर।
शस्य श्यामला भू दिखे, हिय उमंग अरु हर्ष,
करते मंगलकामना, शुभ हो यह नव वर्ष
🙏🙏🌻🌻🌱🌱🌾🌾🌿🌿🌸🌸
-चारु शर्मा
कुछ विचारणीय प्रश्न
1. क्या केवल अहिंदी भाषी प्रांतों में हिंदी का बढ़ता विरोध हिंदी प्रेमियों को इस बात का एहसास कराता है कि हिंदी का तिरस्कार हो रहा है या हिंदी भाषियों का व्यवहार भी इस भावना को प्रबल कर रहा है?
2. क्या वर्तमान में हिंदी की उपयोगिता कम हो गई है और यह आज के तथाकथित आधुनिक युग की आवश्यकताओं को पूरा करने में असमर्थ प्रतीत हो रही है या केवल कुछ लोगों द्वारा इसकी छवि खराब करके इसे आगे बढ़ने से रोका जा रहा है?
3. क्या वर्तमान स्थिति में भी हिंदी प्रेमियों का यह मानना है कि इंग्लिश का प्रयोग अधिक करने वाले गुलामी की मानसिकता से ग्रस्त हैं क्या और इसीलिए आज भी कविताओं और आलेखों में इस बात का उल्लेख किया जाता है ?
4. क्या हम इस बात को स्वीकार करते हैं कि जब इतने भारतीय मल्टीनेशनल कंपनियों में कार्यरत हैं या विदेशियों के साथ व्यापार कर रहे हैं तो इंग्लिश में व्यवहार एक आवश्यकता है? यदि नहीं तो उसका क्या विकल्प है?
5. क्या इंग्लिश का वर्चस्व सचमुच इतना बढ़ गया है कि हिंदी में बोलने वाले व्यक्ति को अल्पज्ञ या अल्पशिक्षित मानकर हीन दृष्टि से देखा जाता है या यह बस कुछ लोगों का भ्रम है ?
6. क्या भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री सहित कुछ अन्य लोकप्रिय व्यक्तियों का हिंदी में वार्तालाप करना और भाषण देना हिंदी की सक्षमता और पहुंँच का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है और हिंदी भाषियों को गर्वित महसूस नहीं कराता?
क्या इन सभी विश्व प्रसिद्द व्यक्तित्वों के उदाहरण उन लोगों का भ्रम दूर करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं जो इंग्लिश बोलने वालों को हिंदी भाषियों से श्रेष्ठ मानते हैं ?
8. हिंदी का स्तर कौन गिरा रहा है? कौन इसका तिरस्कार कर रहा है?
कहीं हिंदी भाषी स्वयं ही मानक हिंदी का प्रयोग करते समय उसकी शब्दावली, वर्तनी, व्याकरण एवं उच्चारण पर ध्यान न देकर उस की छवि एक अल्पशिक्षित वर्ग की भाषा की तो नहीं बना रहे ?
अहिंदी भाषी यदि हिंदी के प्रयोग में गलतियांँ करें तो समझ में आता है किंतु उनकी देखा-देखी जब हिंदी भाषी भी वैसी ही गलतियांँ करने लगें और जानबूझकर उनकी तरह अशुद्ध हिंदी बोलने और लिखने लगें तो यह बात क्या संदेश देती है?
घ) क्या विद्यालय?
बहुत से विद्यालयों में हिंदी का एक भी विस्तृत शब्दकोश नहीं मिलता और न कभी हिंदी अध्यापक उसकी मांँग करते हैं। जहाँ एक ओर इंग्लिश के अध्यापक-अध्यापिका भाषा के प्रति इतने सजग और मेहनत करते दिखाई देते हैं वहीं हिंदी शिक्षकों में इतनी उदासीनता क्यों ?
जब इंग्लिश के शिक्षक एवं शिक्षिकाएँ निरंतर अभ्यास से व्याकरण तथा उच्चारण पर अपनी पकड़ बढ़ा रहे हैं तो हिंदी के शिक्षक-शिक्षिकाएँ क्यों नहीं?
च) क्या शब्दकोश का नगण्य उपयोग ?
इंग्लिश शब्दकोश की तुलना में हिंदी शब्दकोश का प्रयोग बहुत कम लोग करते हैं। स्थिति यह है कि बहुत से हिंदी शिक्षकों तक के घर में हिंदी का एक भी शब्दकोश दिखाई नहीं देता जबकि इंग्लिश का छोटा-मोटा शब्दकोश अवश्य होता है। किसी संशय की स्थिति में वे इंटरनेट पर , जो कि अभी उतना परिपक्व और भरोसेमंद नहीं है, देखकर ही संतुष्ट हो जाते हैं अथवा अपने विद्यालय के शब्दकोश पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में जनसाधारण से तो क्या ही अपेक्षा की जाए ?क्या अच्छे शब्दकोशों के प्रयोग पर बल नहीं दिया जाना चाहिए ?
9. क्या वर्तमान में हिंदी शब्द क्लिष्ट अथवा नाटकीय एवं हास्यास्पद लगते हैं जिस कारण से लोग रोज़मर्रा के वार्तालाप में उनके स्थान पर उर्दू-फा़रसी या इंग्लिश के शब्दों का प्रयोग करने लगे हैं? उदाहरण :
चिह्न - sign
कक्षा - क्लास class
विद्यालय- स्कूल school
शिक्षक / अध्यापक- टीचर teacher
सहस्र - हजा़र
स्पर्धा - कॉम्पीटीशन competition
समय- टाइम time
प्रभावशाली- इंप्रेसिव impressive
प्रभावित- इंप्रेस्ड impressed
अद्भुत - अमेजिंग amazing
कठिनाई -प्रॉब्लम problem
संशय- डाउट doubt
निधन- डैथ death
मांँ - मदर mother/ मम्मी mummy
पिता- फा़दर father /पापा papa
इत्यादि
10. क्या अब, पुनः हिंदी वाक्यों में इन शब्दों का प्रयोग करना हास्यास्पद प्रतीत होगा या हमें धीरे-धीरे एक-एक, दो-दो शब्द करके हमें इनका प्रयोग बढ़ाना चाहिए?
11. जो लोग अभी तक रोज़मर्रा की बोलचाल में अच्छी हिंदी बोल रहे हैं, क्या हमें उन सब का आह्वान नहीं करना चाहिए कि वे अपने बच्चों और उनके बच्चों को भी अच्छी हिंदी सिखाएंँ एवं बोलने के लिए प्रेरित करें?
14. क्या हिंदी प्रेमी इंग्लिश के प्रति वही भाव रखते हैं जो अहिंदी भाषी हिंदी के प्रति? या इनमें कुछ अंतर है?
15. आज की युवा पीढ़ी के लिए अच्छी, शुद्ध हिंदी में बोलना कठिन ही नहीं बल्कि बड़ी उम्र, पुराने ज़माने और आदर्शवादी या रूढ़िवादी मानसिकता का द्योतक है।
इसकी विपरीत, भले ही इंग्लिश में बोलना उनके लिए कठिन हो, वे प्रयास करते हैं क्योंकि वे उसे आधुनिकता एवं समसामयिकता के प्रतीक के रूप में देखते हैं।
हिंदी की इस छवि को हम कैसे बदल सकते हैं? हम निजी स्तर पर हिंदी भाषा के प्रयोग में शुद्धता लाने के लिए कुछ प्रयास कर सकते हैं ?
सभी विद्वज्जनों एवं हिंदी प्रेमियों के लिए ये विचारणीय प्रश्न हैं।
निमंत्रण🙏
दरबार सज रहा है, अंबे का, तुम भी आना।
उर भाव भक्ति का औ, संग पत्र- पुष्प लाना।।
रखना हृदय को निर्मल, और पर्यावरण को भी।
उपयोग न हो प्लास्टिक, निज को स्मरण कराना।।
दरबार सज रहा है, अंबे का तुम भी आना।
उर भाव भक्ति का औ, संग पत्र- पुष्प लाना।।
माँ है पहाड़ों वाली, प्रकृति में निवास उसका।
प्लास्टिक का ढेर उस पर, है हमको नहीं लगाना।।
दरबार सज रहा है, अंबे का तुम भी आना।
उर भाव भक्ति का औ, संग पत्र- पुष्प लाना।।🙏🙏
-चारु शर्मा
19/09/2025
🌿🍁🍀🌺🌸🪷🌸🌺🪻🌼☘️🌿
हिंदी हैं हम🙏😌😊
हिंदी से ह हट रहा है।
इसका प्रयोग घट रहा है।
बड़े-बड़े दिग्गज, शिक्षित जन
करते दिखते यह संशोधन👇😉
"मैं नीं आऊँगा, मैं नीं खाऊंँगा,
मैं तुमको कुछ नीं बताऊंँगा।"😁
मिलते ऐसे कई उदाहरण।
सोच में पड़े वैयाकरण।।
"मैं आ रइ ऊँ, मैं आ री ऊँ,
मैं सब्जी लेने जा री ऊँ।"
कानों को न सुनाई दे रहा,
लिपि में ही ह दिखाई दे रहा।।🤔
महाप्राण व अल्प प्राण में
भी अब तो होता है भ्रम ।
उच्चारण की शीघ्रता में,
अनर्थ कर देते हैं हम।।
*कड़ाही* का हो गया *कढ़ाई*
*गढ़ी* हो रहा है *घड़ी* ।।
*गाढ़ी* सुनाई देता *गाड़ी*
*चढ़ी* बन रहा है *छड़ी* ।।🤦🏻♀️🤷🏻♀️
उथल-पुथल है उच्चारण में,
आग लगी है व्याकरण में।
*मैं* , *मैंने* का भूले अंतर।
*स्त्रीलिंग, पुल्लिंग* हैं छूमंतर।। 🙆🏻♀️🙆🏻♂️
जिसका जो मन, बोल रहा है।
कोई मुख ही मोड़ रहा है।।
खु़द निज भाषा तिरस्कृत कर,
हिंदी भाषी गिरा रहे स्तर।
यूँ मत बने रहो अनजान,
उठो नींद से, लो संज्ञान।।
मातृभाषा है जननी सम,
कभी न आंँकना इसको कम।
अभिव्यक्ति का दे उजाला।
बचपन से हमको है पाला।।
दूर करो हर भ्रम, दिखावा।
शुद्ध हिंदी को दो बढ़ावा।।
(भड़ावा नहीं!🤪😜😃😂)
-चारु शर्मा
09/09/2025
हिंदी पखवाड़ा